उरई जालौन------:( रिपोर्ट भारतNews Nation 24)कोरोना संक्रमित मरीजों में बनने वाली एंटीबाडी की उम्र को लेकर एक नया अध्ययन सामने आया है। इसमें कहा गया है कि एंटीबाडी की उम्र संक्रमण की गंभीरता पर निर्भर करती है। यह शोध लैंसेट माइक्रोब जर्नल में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में कहा गया है कि ठीक हुए मरीजों में अगर एंटीबाडी का स्तर कम भी है तो उन्हें दोबारा संक्रमित होने से बचाया जा सकता है, लेकिन ऐसा तभी संभव है जब टी-कोशिकाओं के चलते उनका इम्यून सिस्टम मजबूत हो।164 कोरोना मरीजों के अध्ययन पर तैयार हुई।शोध में सिंगापुर स्थित ड्यूक-एनयूएस मेडिकल स्कूल के विज्ञानियों ने भी हिस्सा लिया और छह से नौ महीनों तक 164 कोरोना मरीजों का अध्ययन किया। शोधकर्ताओं ने ना केवल एंटीबाडी को बेअसर करने वाले रक्त का विश्लेषण किया बल्कि टी-कोशिकाओं और प्रतिरक्षा प्रणाली को भी परखा। विज्ञानियों ने इस दौरान प्राप्त जानकारी का उपयोग मशीन लर्निग एल्गोरिदम के लिए किया ताकि समय के साथ एंटीबाडी के बेअसर होने का अनुमान लगाया जा सके।
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Bharat News Nation 24
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