उरई जालौन -------:(ब्यूरो रिपोर्ट भारत News Nation 24)उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड जनपद जालौन की मुख्यालय उरई में किसान आंदोलन के समर्थन में किसान संघर्ष मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले किसानों ने गुरुवार को रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रोकने की कोशिश की। इस दौरान सौ से ज्यादा किसानों को हिरासत में ले लिया गया। बाद में देर शाम उन्हेें बिना शर्त रिहा कर दिया गया।
किसान कानून के खिलाफ आंदोलन तेज होता जा रहा है। तयशुदा कार्यक्रम के तहत गुरुवार को किसान स्टेशन के पास नजदीक बेरी वाले बाबा की मजार के पास एकत्रित होने लगे। उधर किसान के प्रस्तावित रेल रोको आंदोलन के कारण रेलवे और सिविल पुलिस भी मुस्तैद हो गई। एडीएम प्रमिल कुमार सिंह, एएसपी अवधेश सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट एसके शुक्ला, जीआरपी झांसी के सीओ नईम खान समेत कई थानों की पुलिस, पीएसी व अग्निशमन दल की गाड़ियां स्टेशन पर पहुंच गईं और स्टेशन को छावनी में तब्दील कर दिया। जीआरपी व आरपीएफ के जवान भी ट्रैक के आसपास डट गए।
इसके बाद भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बलराम लंबरदार और किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक कैलाश पाठक के नेतृत्व में किसान नारेबाजी करते हुए स्टेशन पर पहुंचे। इस पर एडीएम ने उन्हें रोक लिया। किसानों ने कहा कि उनका आंदोलन तय है और वे ट्रेन को रोककर रहेंगे। किसानों के रुख को देखकर एडीएम ने रेलवे प्रशासन से बात कर चार मिनट के लिए ट्रेन का स्टापेज बढ़ाने का अनुरोध किया।् इस पर मुंबई से लखनऊ जाने वाली ट्रेन नंबर 02107 को 12:02 से निर्धारित समय से चार मिनट ज्यादा रोककर 12:08 पर रवाना किया।
इसके बाद प्रशासन ने एक सैकड़ा से अधिक किसानों को गिरफ्तार कर लिया और उन्हें पुलिस वाहनों से पुलिस लाइन ले जाया गया। वहां देर शाम उन्हें बिना शर्त रिहा कर दिया गया। इस दौरान पूर्व विधायक विनोद चतुर्वेदी, अनुज मिश्रा, वीरपाल दादी, सुरेश निरंजन भैयाजी, सुरेंद्र यादव, शिवेंद्र सिंह, जीवन वाल्मीकि, कपिल यादव गुमावली, जयशंकर द्विवेदी, गिरेंद्र सिंह, प्रदीप दीक्षित, महेश द्विवेदी सर, मिर्जा साबिर बेग, शफीकुर्रहमान कश्पी, अशोक महाबली, धीरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
कई बार पुलिस प्रशासन और किसानों में टकराव होते होते बचा। किसान ट्रेन रोकने पर आमादा थे। इसी बीच झांसी की ओर से आ रही मालगाड़ी को भी रोकने की कोशिश की गई। आरपीएफ से किसानों की हल्की झड़प भी हुई। बाद में आरपीएफ जवानों ने अनुरोध किया तो किसान मान गए। बाद में जिला प्रशासन की पहल पर किसानों का ट्रेन रोकने की रस्म अदायगी की।
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