जालौन-------:( ब्यूरो रिपोर्ट भारत News Nation 24)उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड जनपद जालौन रामपुरा खेतों की बुवाई के लिए रामपुरा क्षेत्र का किसान डीएपी खाद लेने के लिए सुबह से लेकर शाम तक रामपुरा सोसाइटी पर चक्कर काटकर घर वापस लौट रहा हैं। रबी की फसलों की बुवाई के लिए किसान खाद के लिए परेशान है।निनावली के किसान गुलाब सिंह, लालताप्रसाद, हेमराज, बुढ़ेरा के किसान लालमन आदि ने बताया कि चार दिनों से रोजना सुबह छह बजे खाद लेने के लिए रामपुरा स्थित सोसायटी पर आ जाते हैं। पर सोसाइटी के कर्मचारियों अपने चहेतों को खाद का वितरण कर अगले दिन खाद देने का आश्वासन देकर चले जाते हैं। किसानों ने कहा कि पहले आधारकार्ड पर खाद दी जा रही थी। परंतु अब खतौनी मांगने लगे हैं, जिसके कारण किसानों को दोनों ओर से परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। किसानों ने बताया कि सचिव की मिलीभगत से खाद की कालाबाजारी की जा रही हैं। जिसके कारण आम जनता को परेशान होना पड़ रहा हैं। किसानों ये तक कहा कि जिस खतौनी पर चार बोरी खाद मिलनी चाहिए। उस पर एक ही बोरी खाद दी जा रही। गुरुवार को भी किसान सोसायटी पर आस लगाए रहे पर खाद नहीं मिल रही है। इस बाबत सचिव राजेंद्र यादव से सोसाइटी पहुंचकर बात की तो उन्होंने बताया कि खाद बांटी जा रही हैं। किसानों के आधारकार्ड तथा खतौनी के आधार पर खाद वितरित की जा रही है।
माधौगढ़-----:सहकारी समितियों में डीएपी खाद न होने से किसान परेशान घूम रहे हैं। खाद न होने से किसानों के फसलों की बुवाई नहीं हो पा रही है। किसानों ने डीएम से मांग की है कि शीघ्र समितियों में डीएपी खाद भेजी जाए ताकि समय से बुवाई हो सके। किसानों के रबी फसलों की बुवाई का समय चल रहा है। वही सहकारी समितियों में डीएपी खाद के न होने से किसानों की बुवाई नहीं हो पा रही है। किसान नारायण सिंह व राजू सिंह का कहना है कि क्षेत्र में खुली सहकारी समितियों में खाद नहीं आती है। अधिकारियों व सचिव की अनदेखी के चलते अधिकांश समिति घाटे का सौदा बनकर रह गई है। किसान संजय भदौरिया अमखेड़ का कहना है डीएपी व यूरिया खाद मिलने का एकमात्र स्थान क्रय विक्रय समितियां ही है। जहां कब खाद आई वितरित हो गई पता नहीं चलता है। डीएपी खाद न होने से सरसों, मटर, चना की बुवाई नहीं हो पा रही है। क्रय विक्रय सचिव चुनूबाद पाल का कहना है कि डीएपी की गाड़ी आती है, वैसे ही एक आधार नंबर से दो डीएपी की बोरी खाद किसान को दी जा रही है।
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