झांसी और ललितपुर के साथ बुंदेलखंड में शामिल जनपद जालौन, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर और महोबा के लोग दूसरे राज्यों में मजदूरी कर रहे हैं। दिल्ली में रहने वाले परिवारों की संख्या सर्वाधिक है। झांसी में ही पंजीकृत मजदूरों की संख्या 1 लाख है। जबकि ललितपुर में 50 हजार है। इसी तरह सभी जिलों का आंकड़ा है। क्योंकि बुंदेलखंड में रोजगार की कमी है लिहाजा काम के लिए लोग दूसरे राज्यों में चले जाते हैं। लॉकडाउन ने इन सभी को बेरोजगार कर दिया है। सभी घर लौट रहे हैं। रविवार को झांसी में 10 हजार से भी अधिक लोग वापस पहुंचे। मऊरानीपुर निवासी कमल ने बताया कि वह दिल्ली में ड्राइवरी करता था लेकिन अब गाड़ियां खड़ी हो गईं हैं लिहाजा उससे भी कह दिया गया कि घर चले जाओ। ललितपुर का दुष्यंत भी राजमिस्त्री है और नोएडा में काम कर रहा था। लेकिन वहां काम बंद होने के बाद सभी मजदूरों को वापस कर दिया गया है। बॉबी फरीदाबाद में परिवार के साथ रह रहा था। लेकिन वहां भी फैक्टरी बंद होने के बाद उसे वापस कर दिया गया। जालौन के सुभाष ने बताया कि गांव में भी जमीन नहीं है। वह आखिर करेगा क्या। चित्रकूट के कपिल ने बताया कि 20 लोगों की टीम पंजाब में गेहूं कटाई के लिए गई थी लेकिन वहां से वापस लौटना पड़ा।
बुंदेलखंड----------: उत्तर प्रदेश में पिछड़े बुंदेलखंड पहले से ही तंगहाली से जूझ रहे बुंदेलखंड वासियों के सामने लॉकडाउन एक बड़ा संकट बनकर सामने आ गया है। यहां के चार लाख से ज्यादा मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। दिल्ली, गाजियाबाद, हरियाणा, पंजाब और मध्यप्रदेश में रहकर मजदूरी करके गुजर बसर कर रहे परिवार अब वापस लौट रहे हैं। रविवार को ही दस हजार से भी ज्यादा की वापसी हुई। प्रशासन का कहना है कि पिछले चार दिनों से हर रोज करीब पांच हजार मजदूर विभिन्न जिलों से झांसी पहुंच रहे हैं। पंजाब में गेहूं कटाई के लिए जाने वाले मजदूरों को भी वापस कर दिया गया है।
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