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Tuesday, 5 May 2020

अखिल भारतीय बढ़ई महासभा द्वारा पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह की 104 वीं जयंती मनायी गयी ।


लखनऊ। अखिल भारतीय बढ़ई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विश्राम शर्मा जी के द्वारा लाॅकडाउन
का पालन करते हुये , महासभा के केंद्रीय कार्यालय लखनऊ में पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह की 104 वीं जयंती समय दोपहर 01 बजे दिन में जयंती समारोह और रात्रि 07 बजे 11 दिप जलाकर कोरोना से लड़ रहें महायोधाओं, शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित कर कार्यालय पर ही मनायी गयी। इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विश्राम शर्मा जी व परिवार के गणमान्य बढ़ई रत्न पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह जी की चित्र पर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किये। महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विश्राम शर्मा ने सभी पदाधिकारियो व सदस्यों से लाॅकडाउन का पालन करते हुये जयंती घर पर ही मनाने का निर्देश पहले ही दे चुके थे। 
        इस अवसर पर प्रेस नोट के माध्यम से महासभा के पदाधिकारियों ने राजनैतिक पार्टियों द्वारा बढ़ई जाति को सत्ता मे भागीदारी नही दिये जाने पर नाराजगी व्यक्त की गयी।
       अखिल भारतीय बढ़ई महासभा के संस्थापक / राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विश्राम शर्मा ने कहा कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह भारत के राष्ट्रपति के पद पर आसीन रहे। ज्ञानी जैल सिंह का जन्म पंजाब में संधवा नाम के छोटे से गांव में पांच मई 1916 को रामगढि़या (बढई जाति) के साधारण परिवार में किशन सिंह के तीसरे पुत्र के रूप में हुआ। ज्ञानी जी का असली नाम जनरैल सिंह था।
    संस्थापक / राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री विश्राम शर्मा ने कहा कि लॉकडाउन के कारण इस समाज के श्रमिक वर्ग परेशान हो गया है। आर्थिक संकट आ खड़ा हुआ है।  काम न मिलने की वजह से श्रमिक भुखमरी के कगार पर है।  जिस उद्योगपति के यहां वर्क किया वहां से पैसे नहीं मिल रहे हैं।  फर्नीचर की छोटी छोटी दुकान खोल कर रोजी रोटी चलाने वाले समाज के लोगों की दुकान बंद होने की वजह से उनका परिवार भुखमरी के कगार पर है। इस वर्ग का किसी सरकारी विभाग मे रजिस्ट्रेशन नहीं होने की वजह से उनको कोई सरकारी सुविधा नहीं मिल पा रही है।  क्योंकि यह वर्ग असंगठित मजदूर है इसलिए मैं भारत सरकार से वह सभी प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से महासभा की तरफ से निवेदन करता हूं।  इस वर्ग को चिन्हित करके आर्थिक सहायता करते हुए जो छोटे छोटे फर्नीचर के दुकानदार जिनका रोजी -  रोटी इसी से चलती है। उन दुकानों को विशेष तौर से खोलने की इजाजत दे दी जाए ।  जिससे यह  वर्ग अपनी रोजी-रोटी अपने परिवार का खर्चा चला सके।
      उन्होने ने कहा कि बढ़ई जाति को कुटीर उद्योग हेतु सरकारी जमीनों का पट्टा व उद्योग हेतु ब्याज मुक्त ऋण दिया जाय। विनोद शर्मा ने कहा कि इंजीनियरिंग तकनीकी संस्थानों में रिक्त कारपेन्टर के पदों पर केवल बढ़ई जाति की नियुक्ति किया जाय।
      श्री शर्मा जी ने कहा कि किसी भी जाति का विकास सत्ता मे भागीदारी के बिना सम्भव नही है, बढ़ई जाति के विकास के लिये बढ़ई विकास निगम की स्थापना करना/ विश्वकर्मा जयंती का राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाये।

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