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Sunday, 14 August 2022

पुलिस प्रशासन की तिरंगा यात्रा के बाद पंचायत राज विभाग ने निकाला कैंडल मार्च

 


आम नागरिकों को याद दिलाई विभाजन की विभीषिका 


उरई जालौन--- रिपोर्ट वीरेंद्र सिंह चौहान की भारतNews Nation 24 उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड जनपद जालौन



देश के प्रधानमंत्री के आवाहन पर जिस तरह पूरे देश में हर घर तिरंगा एवं तिरंगा यात्रा का आज अंतिम दिन था और उसी के क्रम में जिला प्रशासन पूरे तरीके से अच्छे से अच्छा कर गुजरने की भरसक प्रयास में लगा रहा और हर घर तिरंगा के पूर्व संध्या से पहले उरई शहर में पहले ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के द्वारा तिरंगा यात्रा रैली निकालकर अपना प्रदर्शन किया । और उसके बाद पुलिस प्रशासन ने पुलिस लाइन से होते हुए जिला परिषद अंबेडकर चौराहा घंटाघर कोच बस स्टैंड होते हुए जेल रोड से लेकर जिला पंचायत कार्यालय रोड होते हुए वापस पुलिस लाइन पहुंची इसके बाद पंचायत राज विभाग द्वारा शाम ढलते ही 6:00 बजे जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय से कैंडल मार्च निकाला जिसमें विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 14 अगस्त 2022 के नाम पर स्लोगन लिखी तथ्यों के साथ कैंडल मार्च निकाला यह कैंडल मार्च यात्रा जिला कलेक्ट्रेट से होते हुए अंबेडकर चौराहा भगत सिंह चौराहा इलाहाबाद बैंक चौराहा कोच बस स्टैंड होते हुए वापस जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय पहुंची


जो भी 20 काकी तथ्यात्मक रूप से वर्णन की गई पटिया कर्मचारियों के हाथ में थी उसमें लिखा गया है देश के बंटवारे में हुई हिंसा में 5 से 10 लाख निरपराध लोग मारे गए ।


उसी तरीके से दूसरे स्लोगन में लिखा है कि देश के बंटवारे में एक करोड़ 75 लाख से अधिक लोग अपने घर वालों से उजड़ कर शरणार्थी बन गए  ।

और वही तीसरी पट्टिका के नाम से अपने घरों से पलायन करने के दौरान हजारों बच्चों एवं बुजुर्गों से थकावट एवं भुखमरी बीमारी से अपने प्राण गवा दिए उसी तरह विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 14 अगस्त लाखों महिलाओं को अमानवीय अत्याचार बलात्कार हिंसा असहनीय पीड़ा विस्थापन एवं मानसिक वेदना से गुजरना पड़ा ।


 उसी तरह पांचवें से लोगन में लिखा गया है कि विभाजन के कारण पलायन करने को मजबूर हुए लाखों लोग ट्रेनों से वापस आते समय सांप्रदायिक दंगों की भेंट चढ़ गए  ।

वही छठवीं जो पट्टिका थी उसमें लिखा था कि यह मानव इतिहास की सबसे बड़ी विभीषिका  थी विश्व की किसी भी त्रासदी में इतनी बड़ी संख्या में ना तो लोगों ने अपने प्राण गवाएं और ना ही अपने घरों से उजाले गए ।

वही सातवें नंबर के स्लोगन में लिखा है की शरणार्थी बनने को मजबूर हुए करोड़ों लोग अपने घर बार को छोड़कर पैदल ही चल दिए गांव के गांव गुजरते गए काफिलों में बदलते गए और यह काफिला मीलों तक पसरा रहा ।


 वही आठवें नंबर की पट्टिका में लिखा था कि विभाजन की विभीषिका कितनी भाई आ गई थी और इतने लंबे काल तक चली कि दशकों बाद तक लोग पाकिस्तान और बांग्लादेश से बड़ी संख्या में पलायन करते रहे यह त्रासद पूर्ण पलायन किसी न किसी रूप में अभी जारी है ।

उसी तरह नौमी पटका में लिखा है पंजाब की तुलना में बंगाल में दशकों तक जारी विस्थापन की महा बता को बांग्लादेश में किसी भी तरह की राहत देने से इंकार कर दिया । 

उसी क्रम में आखिरी और अंतिम पटका में लिखा था कि मुस्लिम लीग द्वारा 16 अगस्त 1946 को डायरेक्ट एक्शन डे के दंगों से देश के विभाजन के बाद तक दंगे जारी रहे इसमें मुस्लिम लीग की सह पर पाकिस्तानी मिलिट्री मुस्लिम नेशनल गर्ल्स मुस्लिम लीग वॉलिंटियर्स कार्प्स एवं अनुसार जैसे गुटों ने गैर मुस्लिमों ने योजनाबद्ध एवं संगठित रूप से कई हमले किए विभाजन बिभिषिका कैंडल मार्च के माध्यम से सरकार बताना चाहती है । कि हमारे पूर्वजों ने किस किस तरीके से कैसे-कैसे कष्ट खेलें और तब हम सारे देशवासियों को आज यहां तक पहुंचाने का काम किया है जिन्हें हम वर्तमान में आजादी के 75 में वर्ष के रूप में हर घर तिरंगा एवं अमृत महोत्सव के रूप में देश के हर शहर हरगांव हर घर में वंदे मातरम भारत माता की जय और राष्ट्रीय गीतों की धुन से गलियां गुंजायमान हो रही है ।

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