जालौन उरई-------: उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड जनपद जालौन वैश्विक महामारी कोरोना वायरस संक्रमण में दूसरे प्रांतों में गए परिवार लॉकडाउन में किसी तरह गुजर बसर करते रहे। आखिर जब जेब का धन खत्म हो गया और चूल्हे ठंडे पड़ गए तो उन्हें घर की याद सताने लगी। मंगलवार को गोधरा गुजरात से 12 सौ प्रवासी कामगार परिवार स्पेशल ट्रेन से उतरे तो उन्होंने अपनी व्यथा बयां की। उन्होंने पीड़ादायी आवाज में बताया कि किस तरह दिन और रात गुजारे हैं।
-एक दिन खाना मिलता तो अलगे दिन उपवास रखते थे, ट्रेन चलने की जानकारी हुई तो ठेकेदार से रुपये लेकर घर वापसी की है। -प्रदीप कुमार, बलिया सिकंदरपुर
-बिस्कुट, नमकीन की फेरी लगाकर पेट पाल रहे थे। रुपये खत्म होने के बाद जो बचा बिस्कुट और नमकीन था उसी से पेट भरा। -नरसिंह, हरदोई
-जमा पूंजी खत्म हो चुकी थी, खाने तक के लाले पड़ गए थे। घर वापसी के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं था। दो दोस्तों से टिकट के रुपये उधार लेकर आया हूं। -सूरज कुमार, धर्मदास खेड़ा उन्नाव
-तीसरे लॉकडाउन के बाद घर लौटना मजबूरी बन गया था। जो पिछले माह का वेतन मिला था उससे काम चल रहा था। अब ठेकेदार ने भी हाथ खड़े कर दिए थे, वहां पर जिंदगी कटना मुश्किल हो गया था। -रावेंद्र सिंह, गुजैला घाटमपुर
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